6 महीने तक चली गुप्त प्रक्रिया… अब सामने आया 460 से ज्यादा फैकल्टी चयन का सच!

नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के अनुसार, ब्लॉकचेन आधारित डिजिटल प्रणाली के इस्तेमाल से चयन प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और निष्पक्ष बनाया गया है। यह तकनीक डेटा से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना को कम करती है और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने में सहायक है। सोमवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार, एम्स- सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज कैंपस में 50 से ज्यादा विषयों में असिस्टेंट प्रोफेसर से लेकर प्रोफेसर तक के 460 से अधिक खाली फैकल्टी पदों के लिए हुई भर्ती प्रक्रिया के नतीजे घोषित कर दिए। एम्स में 265 पदों और एम्स-सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज कैंपस में 199 पदों के लिए 3200 से ज्यादा उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। 6 महीने तक चली इस पूरी प्रक्रिया में गोपनीयता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ब्लॉक-चेन डिजिटल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया। प्रक्रिया की पूरी ईमानदारी सुनिश्चित करने के लिए, मार्क्स को वन-टाइम पासवर्ड का इस्तेमाल करके डिजिटल रूप से लॉक किया गया था। सॉफ्टवेयर ने इन मार्क्स और पहले से तय एल्गोरिदम का इस्तेमाल करके फाइनल मेरिट लिस्ट तैयार की। इसमें टाई (बराबर अंक) की स्थिति को सुलझाने के अलावा इंसानी दखल की कोई भूमिका नहीं रही। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने 50 से अधिक विषयों में 460 से अधिक फैकल्टी पदों के चयन परिणाम घोषित कर दिए हैं। चयन प्रक्रिया में पहली बार सुरक्षित ब्लॉकचेन डिजिटल तकनीक का उपयोग किया गया, ताकि पूरी प्रक्रिया में गोपनीयता, पारदर्शिता और रिकॉर्ड की विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।

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